एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी

एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी

एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी ThepankajnewsWorld Bank ने पिछले कुछ दिनों में CORONA के साथ बढ़ते संकट में विभिन्न स्तरोपर वित्तीय समस्याओं और समाधानों का अनुमान लगाने की कोशिश की है। वर्तमान में, बैंक ने भारत के साथ दक्षिण एशियाई देशों के आर्थिक विकास के परिणाम प्रस्तुत किए हैं। यह चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास में मंदी की भविष्यवाणी करता है, जिसमें कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में सबसे बड़ी है। इसलिए, भारत की आर्थिक वृद्धि तेजी से गिरने का अनुमान है।

देश की रिपोर्ट पेश करते समय वित्त वर्ष 2019-20 के लिए इसे 4.8 से 5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान था। यह भी कहा जाता है कि 2014 के अंत तक अच्छे प्रदर्शन का रिकॉर्ड CORONA संकट के कारण समाप्त हो गया है।

इस महामारी के कारण श्रीलंका, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश का आर्थिक विकास दर तेजी से घटेगा। दूसरी ओर, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मालदीव की अर्थव्यवस्थाओं को मंदी का सामना करना पड़ेगा। इस रिपोर्ट को जनरेट करने के लिए 7 अप्रैल तक के देशों के डेटा का उपयोग किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि, वित्तीय क्षेत्र के लिए सही मार्ग बनाना होगा, क्योंकि आने वाले दिनों में CORONA वायरस की स्थिति गंभीर होने के असार है।

एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी

एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी
एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी

बैंक-सरकार के लिए नए समाधान

CORONA का झटका दुनिया के सबसे उन्नत देशों पर भी मंडरा रहा है। इसलिए, प्रत्येक देश की बैंक और सरकारें इस संकट को दूर करने के लिए नए पर्यायी विकल्प खोजने की कोशिश कर रही हैं। इसमें सरकार ने एक स्थान से दूसरे स्थान पर काम करने वाले श्रमिकों के समूह के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की है। सरकार और बैंक व्यक्तिगत ऋण के साथ अन्य वित्तीय रियायतें प्रदान करने की कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान में, सरकार ने LOCKDOWN से प्रभावित लोगों के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की है। विभिन्न देश वैकल्पिक रास्ते खोजने की कोशिश कर रहे हैं।Thepankajnews

 Tata Steel के कर्मचारियों को राहत

World Economy को प्रभावित करने वाले CORONA वायरस से नौकरी में कटौती की संभावना है। हालांकि, टाटा स्टील ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया है कि वे वेतन में कटौती या कर्मचारियों में कटौती नहीं करेंगे।

TATA समूह के स्वामित्व वाले Tata Steel के जागतिक CEO. टी. व्ही. नरेंद्रन् ने एक अखबार को दिए मुलाखत में स्पष्ट रूप से कहा कि कर्मचारियों और वेतन में कटौती नहीं की जाएगी। कंपनी का मिशन वर्तमान कर्मचारियों और अधिकारियों की उत्पादकता को बढ़ाने और विकास  बढ़ाने के लिए है। नरेंद्र ने कहा कि स्थिति में सुधार के लिए दीर्घकालीन योजना तैयार की जाएगी।

Lock-down हटाने के बाद बाजार की  स्तिथि कैसे होगी, मांग कितनीं होगी इस्पे उनोने बताते हुए कहा की परिस्थीती अभी सामान्य नहीं हुई है. Lock-down जल्द हटा दिया जायेगा ऐसी आशा है। लेकिन इसके बाद, सब कुछ सही तरहसे शुरू होने में छह महीने से एक साल तक का समय लगेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हम CORONA के खिलाफ कैसे लड़ने जा रहे हैं, ”उन्होंने कहा।

एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी

स्टील का उत्पादन आवश्यक सेवा में शामिल है। फिर भी, स्टील  उत्पादन में गिरावट आई है। Lock-down का टाइम एक चुनौती है, उन्होंने कहा कि टाटा स्टील के कलिंगनगर, जमशेदपुर और अंगुल प्लांट को चालू रखने की अनुमति दी गई है। केवल स्टील नहीं बनाया जा सकता, उसके साथी को कई अन्य चीजों की जरूरत होती है। क्युकि सभी कर्मचारियों को काम पर रखने का खतरा है, इसलिए टाटा स्टील प्लांट में उत्पादन 50 प्रतिशत  चालू है।Thepankajnews

यूरोप में Lock-down नहीं होने से, Tata Steel के प्लांट चल रहे हैं। लेकिन, यूरोप में मोटर वाहन क्षेत्र में मंदी है। उन्होंने कहा कि स्थिति जल्द ही सामान्य होने की संभावना है। कंपनी की प्रॉफिट पिछले दो से तीन सप्ताह से घट हो रही है । लेकिन, इसके लिए दीर्घकालिन योजना है। उन्होंने कहा कि इस पर काम चल रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *